कोरोना मरीजों में चौथे से छठे दिन तक मामूली लक्षण दिखते हैं, 10 से 12वें दिन के बीच पता चलता है कि हालत ठीक होगी या बिगड़ेगी

 कोरोनावायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षण दिखने के बाद ही कैलेंडर पर मार्किंग, बुखार और ऑक्सीजन लेवल की लगातार जांच बेहद जरूरी है। इस वायरस से होने वाली बीमारी के कई लक्षण हैं, लेकिन यह तब ज्यादा खतरनाक हो जाता है, जब एक तय पैटर्न के मुताबिक दिखने लगता है।


डॉक्टर्स के मुताबिक, कोविड 19 से सांस लेने में परेशानी पांचवें से लेकर दसवें दिन तक बढ़ जाती है। खासतौर पर बुजुर्ग, ब्लड प्रेशर, मोटापे और डायबिटीज के मरीजों के लिए यह वायरस ज्यादा घातक है। कम उम्र के मरीजों को परेशानी करीब 10 से 12  दिन बाद महसूस होती है।


वहीं, ऐसे मरीज जिन्हें 14 दिन तक कोई भी लक्षण नहीं दिखता और लगता है कि वे ठीक हो रहे हैं। उन्हें यदि सांस लेने में परेशानी या कोई और लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए। हालांकि अगर आप बीमारी के एक हफ्ते बाद भी खराब महसूस करते हैं तो घबराएं नहीं। कोविड के मामले में यह आम बात है।


कोविड 19 के लक्षणों की टाइमलाइन



  • 1 से 3 दिन- कोविड 19 के शुरुआती लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। यह आपके गले में गुदगुदी, खांसी, बुखार, सिरदर्द और सीने में दबाव से शुरू हो सकते हैं। कभी-कभी यह दस्त से भी शुरू होते हैं। कुछ लोग केवल थकान महसूस करते हैं और स्वाद-सूंघने की शक्ति खोने लगते हैं। कई लोगों में बहुत सारे लक्षण होते हैं, लेकिन बुखार नहीं होता। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल से पीड़ित कुछ लोगों में सांस लेने की परेशानी हो सकती है।

  • 4 से 6 दिन- कुछ मरीजों में बेहद मामूली या न के बराबर लक्षण दिखते हैं। मामूली बीमार कुछ बच्चों और युवाओं में रेशेज और खुजली करने वाले लाल चिट्टे, अंगूठे और उंगलियों पर छाले हो जाते हैं। हालांकि इन लक्षणों का समय तय नहीं है, हो सकता है कि ये लक्षण संक्रमण की शुरुआत में दिख जाएं या फिर ठीक होने के बाद। यूनिवर्सिटी ऑफ एलबर्टा में संक्रामक बीमारियों की सहायक प्रोफेसर डॉक्टर इलन श्वार्ट्ज के साथ भी ऐसा ही मामला हुआ था। 

  • 7 से 8 दिन- मामूली लक्षणों वाले मरीजों के लिए केवल एक हफ्ता ही बदतर है। सीडीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक वो मरीज जिनके लक्षणों में सुधार है और तीन दिन तक बुखार नहीं है, वे आइसोलेशन से बाहर आ सकते हैं। लेकिन कुछ मरीजों को लगातार बुरा महसूस हो सकता है। वहीं, कुछ पेशेंट हालात खराब होने के बजाए अच्छा महसूस कर सकते हैं। अगर मरीज बीमार महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें ऑक्सीजन स्तर की जांच और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर रिचर्ड कहते हैं कि  हम मरीजों को डॉक्टर के पास कम जाने की सलाह देते हैं। मुझे लगता है कि उन्हें मॉनिटरिंग के लिए फिजीशियन की सलाह लेनी चाहिए।

  • 8 से 12 दिन- माउंट सिनाई नेशनल जूइश हेल्थ रेस्पिरेट्री इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉक्टर चार्ल्स ए पॉवेल बताते हैं कि 8वें से 12वें दिन में हमें पता लग जाता है कि हालत ठीक होगी या और बिगड़ेगी। हमें सबसे ज्यादा चिंता 8-12 दिन को बीच हालात बिगड़ने की होती है। इस दौरान सांस लेने में तकलीफ और गंभीर खांसी की शिकायत होती है। डॉक्टर के मुताबिक अगर व्यक्ति को घर पर असहज महसूस हो रहा है और घर वाले स्थिति संभालने में परेशान हो रहे हैं तो उन्हें फिजीशियन से जांच करानी चाहिए। डॉक्टर पॉवेल के मुताबिक हम खून में ऑक्सीजन के स्तर के बिगड़ने का इंतजार नहीं करना चाहते। 

  • 13 से 14 दिन- मामूली लक्षणों वाले मरीज अब तक ठीक हो जाने चाहिए। मरीज जो गंभीर लक्षण महसूस कर रहे है, लेकिन उनका ऑक्सीजन स्तर सामान्य है तो वे दो हफ्तों में ठीक हो सकते हैं। हालांकि गंभीर लक्षण और कम ऑक्सीजन से अस्वस्थ महसूस कर रहे मरीजों को ठीक होने में लंबा वक्त लग सकता है। 


लक्षणों की ट्रैकिंग का ध्यान रखें 



  • अपने लक्षणों की ट्रैकिंग का ध्यान रखें। क्योंकि यह बीमारी दूसरे हफ्ते में गंभीर रूप ले रही है। डॉक्टर्स मरीजों में एक गंभीर तरह का निमोनिया देख रहे हैं। कोविड निमोनिया से पीड़ित मरीजों के स्कैन में एक ग्राउंड ग्लास ओपेसिटीज जैसा कुछ नजर आ रहा है।

  • यह फेफड़ों के नीचले हिस्से में धुंधला दिखाती है। ऑक्सीजन स्तर इतना तेजी से गिरता है कि, मरीज को पता भी नहीं चलता। इस स्थिति को हाइपोक्सिया कहते हैं। आमतौर पर यह तब तक नहीं होता, जब तक ऑक्सीजन बेहद निचले स्तर पर न पहुंच जाए। जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।

  • अपने स्वास्थ्य पर नजर रखने का सबसे अच्छा तरीका पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल करना है। खून में ऑक्सीजन का लेवल नापने वाली यह एक छोटी डिवाइस होती है, जो उंगली पर लगाई जाती है। सामान्य ऑक्सीजन रेंज 96 से 99 प्रतिशत होती है। अगर यह आंकड़ा 92% पर आ गया है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • आप घर में पेट के बल लेटकर और कुर्सी पर सीधे बैठकर ऑक्सीजन फ्लो सुधार सकते हैं। ऑक्सीजन के गिरते स्तर का एक और संकेत है छोटी और तेज सांस लेना। ऑक्सीजन के कम स्तर वाले मरीजों के होठों और त्वचा पर नीलापन आ जाता है। 


गाइडलाइंस मुख्य परेशानी की वजह हैं
डॉक्टर्स के मुताबिक, पब्लिक हेल्थ गाइडलाइंस में मरीज से कहा गया है कि अस्पताल तभी आएं जब सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होने लगे। इसके चलते कई मरीज डॉक्टर से बात करने में देर कर देते हैं। न्यू हैम्पशायर के डॉक्टर रिचर्ड लेविटन बताते हैं कि पब्लिक हेल्थ के नजरिए से हमारा लोगों को यह बताना गलत होगा कि सांस में गंभीर परेशानी के बाद ही अस्पताल आएं। डॉक्टर रिचर्ड ने ही कोविड 19 बीमारी के शुरुआती दो हफ्तों में होम पल्स ऑक्सीमीटर इस्तेमाल करने की अपील की थी। 


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